हरिद्वार की खबरे - कोविड-19 वैक्सीनेशन के कार्यों का अपर मेला अधिकारी ने किया निरीक्षण दिए निर्देश

 कोविड वैक्सीनेशन कार्य को गति देने के लिए अपर मेलाधिकारी रामजी शरण शर्मा ने ऋषिकुल आयुर्वेदिक कालेज परिसर में कुंभ को लेकर चल रहे कोविड वैक्सीनेशन के कार्य का निरीक्षण किया। उन्होंने वहां उपस्थित स्वास्थ्यकर्मियों और मेला प्रशासन से जुड़े अधिकारियों को शत प्रतिशत वैक्सीनेशन कराने के कार्य को पूरी तन्मयता और जिम्मेदारी से पूरा कराने का निर्देश दिया। उन्होंने खुद भी कोविड का टीका लगवाया और कहा कि यह कोविड से बचाव का सर्वोत्तम उपाय है। जिसका भी पंजीकरण कोविड वैक्सीनेशन के लिए हुआ है। वह अपने निर्धारित केंद्र पर पहुंचकर वैक्सीनेशन कराएं और स्वास्थ्य विभाग की ओर से दिए दिशा निर्देशों का पालन करें। यह सभी के सुरक्षित स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। उन्होंने टीम के लोगों को इसके प्रति और जागरूकता फैलाने का भी निर्देश दिया। अपर मेलाधिकारी ने कहा कि कुंभ को निर्विघ्न और कोविड सुरक्षित कराना सभी का सामूहिक दायित्व है। निरीक्षण के दौरान उप मेलाधिकारी किशन सिंह नेगी, उप जिलाधिकारी गोपाल सिंह चैहान, तहसीलदार मंजीत सिंह गिल, डा.नरेश चैधरी आदि मौजूद रहे।


कुम्भ मेले को लेकर जारी एसओपी के विरोध में होटल एसो.ने दी आंदोलन की चेतावनी

हरिद्वार। कुम्भ मेले को लेकर केन्द्र सरकार द्वारा जारी एसओपी के विरोध में होटल सुविधा के सभागार में बजट होटल एसोएिशन, टैªवल्स एसोसिएशन एवं होटल एसोसिएशन ने बैठक कर आंदोलन की चेतावनी दी है। शुक्रवार को पत्रकारों से वार्ता करते हुए बजट होटल एसो. के अध्यक्ष कुलदीप शर्मा ने कहा कि कुम्भ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कोरोना निगेटिव रिपोर्ट एवं पंजीकरण की बाध्यता अव्यवहारिक है। जिसके विषय में जिलाधिकारी को अवगत करा दिया गया था तथा उनसे यह अपेक्षा की गयी थी कि ऐसे अव्यवहारिक नियमों में शिथिलता प्रदान की जानी चाहिए और कुम्भ मेले को सीमित किया जाना चाहिए। अप्रैल माह में पड़ने वाले पर्वों, स्नानों के लिए नोटिफिकेशन जारी होना चाहिए। सामान्य स्नानों पर राज्य सरकार की पूर्व की भांति एसओपी बनायी जाये। जिसमें कोरोना नेगेटिव की रिपोर्ट लाने एवं रजिस्ट्रेशन की बाध्यता में छूट होनी चाहिए। जिलाधिकारी ने स्वीकार करते हुए 9 फरवरी को नयी एसओपी जारी कर हमारी मांगों पर सहमति प्रदर्शित की थी। लेकिन प्रशासन ने नयी एसओपी का प्रचार-प्रसार नहीं किया। जिससे हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं में मौनी अमावस्या स्नान को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रही और होटल व्यवाससियों के लगभग 5 हजार कमरों की बुकिंग कैंसिल हो गयी। जिससे होटल एवं पर्यटन व्यवसाय को करोड़ों का नुकसान हुआ है। होटल एसो. हरिद्वार के अध्यक्ष आशुतोष शर्मा ने कहा कि पिछले कई वर्षों से सरकार का पर्यटन व होटल व्यवसाय के प्रति नजरिया उपेक्षा भरा रहा है। केन्द्र सरकार ने एसओपी जारी की है। उससे पर्यटन व्यवसाय चैपट हो गया है। जबकि कुम्भ मेले को लेकर होटल एवं ट्रैवल्स व्यवसासियों को बड़ी आशा थी। आशुतोष शर्मा ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि वर्तमान में जारी एसओपी को निरस्त कर दिव्य, भव्य कुम्भ मेले में तीर्थयात्रियों के आने का मार्ग प्रशस्त करे। हरिद्वार ट्रैवल्स एसो. के अध्यक्ष उमेश पालीवाल ने कहा कि हमारा संगठन एसओपी के पूर्ण से विरोध में है। केन्द्र ने जो मौनी अमावस्या पर एसओपी जारी की उससे यात्रियों ने अपनी बुकिंग कैंसिल करवा दी। जिससे ट्रैवल्स एजेंड़ों और यात्रियों के बीच विवाद उत्पन्न हो गया है। उन्होंने कहा कि एसओपी पूर्ण रूप से अव्यवहारिक है। युवा पुरोहित सौरभ सिखौला ने कहा कि कुम्भ केवल अधिकारियों और संत समाज का ही नहीं है यह आम हिन्दू जनमानस का महान पर्व है। ऐसे में सरकार द्वारा हिन्दू समाज को स्नान से रोकने के लिए बाध्याएं खड़ी करना धर्म विरूद्ध है और इसका प्रबल विरोध किया जायेगा। होटल व्यवसायी विभाष मिश्रा ने कहा कि सरकार होटल एवं ट्रैवल्स व्यवसायी से खिलवाड़ बंद करे, व्यवसासियांे की पीड़ा को समझते हुए एसओपी को व्यवहारिक बनाये और भय, बाधा मुक्त कुम्भ स्नान को निर्विघ्न सम्पन्न करवाये अन्यथा होटल व्यवसायी आन्दोलन करने को विवश होंगे। होटल व्यवसायी और संरक्षक विनोद शर्मा एवं मिन्टू पंजवानी ने सरकार से अपील करते हुए कहा कि एसओपी को सरल और व्यवहारिक बनाये न कि कुम्भ मेले में बाध्याएं उत्पन्न करने का कार्य करे। इस दौरान अशोक कुमार, राजेन्द्र अग्रवाल, योेगेन्द्र शर्मा, राकेश अग्रवाल, आशीष शर्मा, अमित कुमार, दीपक शर्मा, लक्की आहुवालिया, प्रवीण शर्मा, दीपक कपूर, धीरज नेगी, उमाशंकर पाण्डे, सचिन भारद्वाज, आकाश जैन, आदित्य, अंशुल जैन, सनिक मेहता, तारालाल, चन्द्रकान्त शर्मा, रामविलास आदि उपस्थित रहे। 

 

समीक्षा के दौरान लक्ष्य के सापेक्ष डिस्बर्समेंट पर जिलाधिकारी ने जतायी  नाराजगी

जिलाधिकारी सी रविशंकर ने कलेक्ट्रेट सभागार में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना की समीक्षा बैंको के साथ की। उन्होंने सभी बैंकों के ब्रंाच मैनेजर के साथ सीधा संवाद किया। डीएम ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के इस वित्त वर्ष के लक्ष्य के सापेक्ष डिस्बर्समेंट की स्थिति पर असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि सभी बैंक और जिला उद्योग केंद्र बैठक के माध्यम से लाभार्थियों के सेंक्शन में समस्या का निराकरण और तेजी से डिस्बर्समेंट के लिए आपसी समन्वय से कार्य करें। बैंको केे अर्हता मानकों को पूर्ण करने, लाभार्थियों को बैंको के सहयोग न करने व समय से और सटीक जानकारी न मिलने की शिकायतों पर जिलाधिकारी ने लीड बैंक मेनेजर को एक बैंकिंग हेल्पलाइन पटल शुरू करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि सभी बैंक एक निर्धारित प्रारूप बनायें जिसे किसी आवेदन को निरस्त करते समय निरस्तीकरण के कारणों सहित आवदेक को लौटाया जाये। जिससे आवेदक अपने कागजात को पूर्ण कर पुनः आवेदन कर सके। सभी बैंक शाखाओं ने अगले सप्ताह इस वर्ष वित्त वर्ष के लक्ष्य को पूर्ण कर डिस्बर्समेंट कर दिये जाने का आश्वासन जिलाधिकारी को दिया। बैठक में महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र श्रीमती पल्लवी गुप्ता सहित अनेक बं्राच प्रबंधक उपस्थित रहे।


बैरागी अखाड़ों ने अखाड़ा परिषद कार्यकारिणी भंग कर की दोबारा चुनाव कराने की मांग 


तीनों बैरागी अणियों ने खुद को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद से अलग करते हुए अखाड़ा परिषद के चुनाव की मांग की है। 18 बैरागी अखाड़ों का प्रतिनिधित्व करने वाली अणियों के प्रतिनिधियों ने पत्रकार वार्ता कर इसकी घोषणा की। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद में शामिल सभी संन्यासी अखाड़े अपना तो काम करा रहे हैं, लेकिन बैरागी अखाड़ों के कामकाज और मांग पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बैरागी कैंप क्षेत्र में शुक्रवार को पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया। इस दौरान बाबा हठयोगी, महंत दुर्गा दास, महंत रामशरण दास और जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी अध्यक्षाचार्य ने आरोप लगाया कि न तो सरकार और न ही अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद बैरागी अखाड़ों की कुंभ अवस्था को लेकर उनकी मांग पर कोई ध्यान दे रहा है। उन्होंने अखाड़ा परिषद को भंग करने का एलान करते हुए नए सिरे से चुनाव कराने की बात कही। साथ ही यह भी कहा कि नई अखाड़ा परिषद में परंपरा के अनुसार अध्यक्ष और महामंत्री का पद संन्यासी और बैरागी अखाड़ों के बीच ही होगा। अध्यक्ष और महामंत्री पद पर सन्यासियों का कब्जा है। जिस कारण बैरागी संतों की लगातार उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सन्यासी संत सरकार से अपने सारे निर्माण कार्य एवं स्थाई कार्य करा रहे हैं और बैरागी संतो को नजरअंदाज कर रहे हैं। जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बाबा हठयोगी ने कहा कि 1 माह के भीतर अखाड़ा परिषद का दोबारा चुनाव कराया जाएगा और वैधानिक तरीके से अध्यक्ष और महामंत्री को चुना जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान अखाड़ा परिषद अध्यक्ष शासन प्रशासन के साथ मिलकर बैरागी संतो की उपेक्षा कर रहे हैं, जो बहुत ही दुख की बात है। उन्होंने कहा कि वृंदावन मेले के बाद लाखों की संख्या में वैरागी संत हरिद्वार कूच करेंगे। यदि शासन प्रशासन संतो को सुविधा उपलब्ध कराता है तो ठीक है अन्यथा तीनों बैरागी अखाड़े और उनके खालसे अपने स्तर पर कुंभ की तैयारियां करेंगे फिर चाहे शासन गोली चलाए या डंडे चलाए बैरागी संत अपना कुंभ अपने स्तर पर करेंगे। जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी अयोध्याचार्य महाराज ने कहा है कि शासन प्रशासन से लगातार मांग करने के बाद भी बैरागी संतों के कोई भी कार्य नहीं किए जा रहे हैं। लगातार उपेक्षा से परेशान संतो को दुख के साथ यह निर्णय लेना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बैरागी अखाड़े अब अपने स्वयं के स्तर से शाही स्नान धर्म ध्वजा के साथ-साथ कुंभ से जुड़ी सभी मूलभूत सुविधाएं स्वयं उपलब्ध कराएंगे। अखिल भारतीय श्री पंच निर्मोही अनी अखाड़े के सचिव महंत रामशरण दास महाराज ने कहा है कि अनादि काल से बैरागी कैंप में बैरागी संत शिविर आदि लगाते आए हैं। कोरोनावायरस को बहाना बनाकर बैरागी संतो के साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है। अतिक्रमण के नाम पर मेला प्रशासन भी बैरागी संतो को बरगला रहा है। कुंभ के नाम पर प्रशासन किसी तरह का सहयोग नहीं कर रहा है। जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अखाड़ा परिषद का चुनाव जल्द से जल्द कराया जाएगा और वैधानिक तरीके से कार्यकारिणी का गठन किया जाएगा। महंत दुर्गादास महाराज ने कहा कि बैरागी संतो की उपेक्षा किया जाना सरासर गलत है। यदि सरकार मूलभूत सुविधाएं नहीं उपलब्ध कराती है तो वैरागी संत आंदोलन के तौर पर राम नाम का जप करेंगे और अपनी परंपरा अनुसार शाही स्नान करेंगे। आज तीनों बैरागी अखाड़ों के संतों ने अखाड़ा परिषद की वर्तमान कार्यकारिणी को भंग कर दिया है। इस दौरान महंत प्रह्लाद दास, महंत राजेंद्र दास, महंत अगस्त दास, महंत सिंटू दास, स्वामी अमित दास आदि संत मौजूद रहे।


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